प्रशिक्षण मॉडयूल एवं मार्गदर्शन


पंचकर्म

पंचकर्म में सुरक्षा एवं मूलभूत प्रशिक्षण पर मार्गदर्शन

वर्ष – 2008 – पृष्ठ 94

मूल्य – रूपये 100.00 , यूएसएस 35.00

पंचर्कमा आयूर्वेद एक अनुपम जीव उपचार विधान है। भेषजगुण विज्ञानीय चिकित्सा में पाँच प्रक्रियाओं से बेहत्तर जीव उपलब्ध सुविधा प्रदान करती है तथा शरीर की मनोदशा, शरीर से विषैला अवयव को रोग के कारणों का निराकरण करने में सहायता करती है। जब कुशलपूर्वक एवं उचित रूप से प्रयोग किया जाता है। पंचर्कम प्रक्रिया असंख्या स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण एवं प्रबन्धन में सुरक्षित एवं प्रभावकारी है। वर्तमान परिदृश्य में यह अनुपम प्रक्रिया चिकित्सकों द्वारा भारत में एवं अन्य ग्लोबल देशों में विस्तृत रूप से अभ्यास की जाती है। प्रोफालैकटिक एवं चिकित्सीय उद्देश्य के अतिरिक्त चिरकालिक एवं प्रतिरक्षित रोगों में जीवन के गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।


आयुर्वेद के गोलबल प्रचार से औषधियों के सुरक्षा एवं प्रभावकारिता आधारित चिकित्सा प्रक्रिया से पंचकर्म का महत्वपूर्ण संबंध है। शास्त्रीय एवं अभ्यास पर सुरक्षित पंचकर्म अभ्यास को एक आदर्श मार्ग दर्शन को प्रचारित करने का समय है। गोलबल आवश्यकता की अनुसंशा को देखते हुए केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसंधान परिषद्, आयुष विभाग ने पंचकर्म में सुरक्षा पर मूलभूत प्रशिक्षण के लिए मार्ग दर्शन का मसौदा तैयार किया है। कार्यक्रम संरचना पर मार्ग दर्शन की संपूर्ण रुप से समिक्षा की गई तथा राष्ट्रीय कार्यशाला में इसको अंतिम रुप दिया गया। जिसमें विषय विशेषज्ञ से सुझाव आमंत्रित किए गए।


इन मार्ग दर्शन की परिधि में पंचकर्म पर मूल सूचनाएं, पंचकर्मा देने वाले के प्रकार, प्रशासनिक, शैक्षणिक विचार,परीक्षा एवं अनुज्ञा,पंचकर्म में प्रशिक्षण का स्तर पाठयक्रम तथा पंचकर्मा के सुरक्षा का मार्ग दर्शन का आवरण है। कार्यक्रम संरचना पर अनुलग्नक एवं शिक्षण अवधि की अनुसंशा, तकनीकी शब्दावली से देश को एवं संस्थान पंचकर्म प्रशिक्षण में गहन रुप से भाग लेना चाहते है। सहायता मिलेगी तथा जो संस्थान पंचकर्म प्रशिक्षण में गहन रुप से भाग लेना चाहते है।


 इन अनुपम मार्ग दर्शन से वैज्ञानिकों, शिक्षार्थियों, अभ्यासकों, शोधकर्ता विद्वान एवं छात्रों को पंचकर्म की उपादेयता से भारत में एवं गोलबल के देशों में बेहतर स्वास्थ्य रक्षा सेवा व्यवस्था में अत्यधिक सहायता मिलेगी।