प्रशिक्षण मॉडयूल एवं मार्गदर्शन


बौध्दिक संपदा अधिकार

प्रस्तावना

बौध्दिक संपदा अधिकार (आई पी आर) में विभिन्न प्रकार के अधिकार होते हैं जो कि मानव बौध्दिक अनुप्रयोग से बचाव करती है जो व्यावसायिक मूल्य के भी हो सकते हैं। वे परिषद् के क्रियाकलापों में बहुत ही सुसंगत हैं जिनमें पेटेन्ट जिसे केवल व्यापक अनुमति के बाद ही दिया जाता है, कॉपीराइट डिजाइन “जानकारी” न्न जिसे कि गोपनीय समझौते और ट्रेडमार्क द्वारा सुरक्षित किया जा सकता है।

 

इस पॉलिसी ने बौध्दिक संपदा के स्वामित्व, संरक्षण और अनुसंधान के संबंध में परिषद् की स्थिति को प्रदर्शित किया है। पॉलिसी विवरण के अनुसार इसका उद्देश्य सभी संभावनाओं के साथ सर्वांगपूर्ण सौदा करना नहीं है किन्तु ऐसा ढाँचा तैयार करना है जिसमें निर्णय व्यक्तिगत मामलों तक पहुँच सके।

बौध्दिक संपदा अधिकार के सभी मामलों और प्रक्रियाओं में परिषद् के कर्मचारियों और अधिकाधिक जनता के लाभ तथा अन्यों के विधि संगत अधिकारों के सम्मान का ध्यान रखा गया है। बौध्दिक संपदा (आई पी) में सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा को परिषद् द्वारा प्रस्तुत करना या प्राप्त करना शामिल है, इसके स्टाफ में (नियत - अवधि आधार पर नियुक्त किए गए) और आधार करने वाले परिषद् से बाहर के कार्मिक भी शामिल हैं।

केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद् की बौध्दिक संपदा अधिकार नीति अनुसंधान कार्यों द्वारा प्राप्त नई जानकारी से वैज्ञानिकों को पहचान, सुरक्षा और व्यावसायिक शोषण से बचाव के लिए उनके प्रयासों में मदद करती है।

मुख्य उद्देश्य:

  1. बौध्दिक संपदा अधिकारों के माध्यम से उत्पन्न जानकारी का संरक्षण, जीव विज्ञान संबंधी स्वामित्व और अन्य सामग्री तथा सी.सी.आर.ए.एस. की निधि तथा सुविधावों का प्रयोग करके डाटा तैयार करना।
  2. यह सूचित करना कि सी.सी.आर.ए.एस. के सभी कर्मचारी सी.सी.आर.ए.एस. की बौध्दिक संपदा नीति में शामिल हैं और उनकी सेवा के दौरान जो भी आविष्कार और खोज होंगे सी.सी.आर.ए.एस. के होंगे।
  3. सी.सी.आर.ए.एस. के वैज्ञानिकों में नई बौध्दिक संपदा उत्पादों के बचाव की प्रक्रिया के बारे में जागरुकता उत्पन्न करना।
  4. सी.सी.आर.ए.एस. के संस्थानों में नीति का विकास और कार्यान्वित करना ताकि पुरस्कार पध्दति द्वारा वैज्ञानिकों और तकनीकी उत्पन्न करने वालों को प्रोत्साहित किया जा सके।

दिशा निर्देश

  1. वैज्ञानिकों को इस बात की जानकारी देना कि उनकी सेवा के दौरान किए गए सभी आविष्कार और खोज परिषद् से संबध्द होंगे। कोई भी खोज और आविष्कार जो पूर्ण या आंशिक अथवा परिषद् के किसी भी कर्मचारी के मार्गदर्शन से किया गया हो, जिसे परिषद् द्वारा सहायता दी गई हो या परिषद् द्वारा निधियों का नियंत्रण और प्रबंधन किया गया हो, परिषद् से संबंधित होगा।
  2. परिषद् के सभी कर्मचारियों द्वारा संरक्षा, पेटेन्ट और स्थानांतरण की प्रक्रिया से प्रारंभ करके सभी आविष्कारों को परिषद् को उचित रुप से बताना होगा। कर्मचारी प्रथम परिषद् को सूचित करेगा तभी आविष्कार पूरा होगा। इसके विकसित होने तक अतिरिक्त सूचना सम्मिलित की जा सकती है, जब तक आविष्कार पूरा हो और आविष्कार के लिए कार्यकारी शीर्षक दिया जाए।
  3. प्राधिकरण द्वारा आविष्कारों और खोजों, जिसमें तकनीकजानकारी शामिल है, का प्रबंधन किया जाएगा, जो लाइसेंस योग्य हो सकता है, लेकिन जिसे पेटेन्ट नहीं कराया जा सकता अथवा पेटेन्ट परिषद् के निदेशक के निहित होगा। आवश्यकतानुसार मूल्यांकन हेतु और पेटेन्ट प्राप्त करने के लिए निदेशक द्वारा इस नीति के अंतर्गत परिषद् के किसी अन्य कर्मचारी को प्राधिकृत किया जा सकता है, जैसा आवश्यक समझा जाए। इन आविष्कारों को व्यापारीकरण हेतु परिषद् को दिया जाए।
  4. परिषद् अपनी सभी बौध्दिक संपदाओं का प्रयोग स्वयं करेगी। यदि परिषद् किसी विशेष बौध्दिक संपदा का व्यापारीकरण करना चाहती है।
  5. सहयोगी अनुसंधान और विकास की तकनीकों, बौध्दिक संपदा के स्वामित्व के मामले में परिषद् किसी अन्य को अधिकृत करती है, या किसी अन्य द्वारा अधिकृत की जाती है उन अनुसंधानों और विकास परियोजनाओं से प्राप्त परिणामों को उन अपने-अपने सहयोगी अनुबंध द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  6. जहाँ तक संभव हो सके पेटेन्ट आवेदन - पत्र भरने के बाद ही अनुसंधान परिणामों को प्रकाशित किया जाना चाहिए। प्रकाशन पहले से होने की अवस्था में प्रकाशन के बाद छह महीने के भीतर पेटेन्ट आवेदन दाखिल हो जाना चाहिए।
  7. परिषद् के प्रबंधन और बौध्दिक संपदा के सहयोग के संबंध में परिषद् निदेशक उच्चतम अधिकारी है।
  8. बौध्दिक संपदा नीति योजना और बौध्दिक संपदा संबंधी विषय परिषद् के संपूर्ण विषयों का उत्तरदायित्व विधि विभाग को होगा। प्रत्येक प्रयोगशाला में बौध्दिक संपदा एवं प्रोन्नति विभाग बौध्दिक संपदा से संबंधित अन्य मामले प्रयोग, अभिलेख, लाईसेंस और उनकी प्रयोगशाला में बौध्दिक संपदा के आबंटन के लिए उत्तरदायी है।
  9. आविष्कार पेटेन्ट, ट्रेडमार्क (व्यापार चिंह) तथा जानकारी को लाइसेंस द्वारा अनुबंध आधार पर प्रबंधन के माध्यम से जनता के लिए उपलब्ध किया गया है।

प्रौद्योगिकी स्थानांतरण

जब एक पेटेन्ट का लाईसेंस (अनुज्ञप्ति) प्राप्त हो जाता है तब अनुसंधान संस्थान से उद्योग को प्रौद्योगिकी का स्थानांतरण कर सकते हैं, परिषद् के पास अभी तक पेटेन्ट का स्वामित्व है किंतु अधिन्यासक को औषधि बनाने प्रयोग करने अथवा आविष्कार को बेचने की अनुमति दी जाती है। लाईसेंस एग्रीमेंट (समझौता) पार्टियों के बीच एक अनुबंध है और पार्टियों द्वारा किया गया कोई भी करार शामिल है। विशेष रुप से लाइसेंस एग्रीमेंट में यह विवरण होता है कि लाईसेंस धारक द्वारा आविष्कार का क्या प्रयोग किया जाएगा (बनाना, प्रयोग करना या बेचना), लाईसेंसदाता (अनुज्ञप्ति दाता) परिषद् को एक अवधि के लिए क्या भुगतान किया जाएगा, सामान्यत: आविष्कार को अन्य उद्योग को स्थानांतरण करने का अधिकार रखा जाता है।

 

आई.सी.एम.आर. के मुख्यालय में स्थित बौध्दिक संपदा अधिकार एकक वैज्ञानिकों को आई.सी.एम.आर. के सहयोग से उत्पन्न नई जानकारी की पहचान संरक्षण तथा व्यावसायिक अवशोषण के रोकने के प्रयासों में सहायता करेगी।