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घरेलू उपचार सोवा रिग्पा के जुंग-वा-ना भेषजगुण विज्ञान आधारित सिध्दान्त पर सोवा रिग्पा का विश्वास है कि पृथ्वी पर प्रत्येक उपादान का चिकित्सीय मूल्य एवं चिकित्सा क्षमता है । चिकित्सीय उपादान को आठ वर्गों में वर्गीकृत किया गया है यथा - रिनपोछेस्मान (बहुमूल्य धातुएं एवं रत्न) , सा मान (पृथ्वी एवं दलदलीय भाग से उत्पन्न औषधियां) , दो समन (पत्थर), शिंग समन (वृक्षों से प्राप्त औषधि), चि समन, (आसव एवं स्त्राव औषधि), थंग समन, (घनसत्व हेतु पादप संघटकपादप औषधिझाड़ी), स्नोसमन (वनस्पति) एवं स्रोग छाग्स समन (जीव-जन्तु भाग), औषधियों का संघटक एवं एकल या मिश्रित औषधियों के रुप में प्रयोग की जाती है । मिश्रित औषधि दो बृहत क्रम परिवर्तन पर आधारित समिश्रण है । औषधि तैयार करने की लगभग 17 विभिन्न प्रकार है जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तैयार की गई यथा - घनसत्व, चूर्ण, अवलेह, औषधियुक्त घृत, भस्म,आसव, लेपन, औषधि युक्त स्नान आदि द्वारा चिकित्सा करना । औषधियों के मिश्रित तत्वों का निर्धारण 6 तत्वों के रस के आधार पर किया जाता है । यथा -मधुर, खट्टा, नमकीन, तिक्त, कषाय एवं कटु । जिसमें से मधुर स्वाद, सा (पृथ्वी) तथा छू (जल) तत्व, की अधिकता से होता है खट्टा का स्वाद मे (अग्नि) तथा सा (पृथ्वी) की प्रबलता से, नमकीन छू (जल) एवं मे (अग्नि) की अधिकता से कटु स्वाद छू (जल)एवं लुंग (वायु) |
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