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उद्‍गम


सिध्द चिकित्सा पध्दति की उत्पत्ति (उद्‍गम) का प्रतीक स्वयं शिव को माना जाता है । भगवान शिव को प्रथम सिध्द माना जाता है। उन्होंने अपनी पत्नी पार्वती को उपदेश दिया तथा उन्होंने नन्दिनी के सौंपा तथा उसने सिध्द को । उन्होने संत अगस्थियार को शिक्षा दी तथा अगस्थियार ने पुलथियार, बोगर,थेरियार और पोथिगल पहाड  के अन्य लोगों को ।


तमिलनाडु के विभिन्न भागों में शिव मंदिर का नाम वैदीश्वरण,मरुन्दीश्वरण है । विश्व में विभिन्न् संस्कृतिक परम्परा से उत्पन्न समाज को उपयुक्त चिकित्सा  पध्दति उपलब्ध कराने के विषय में गंभीर है तथा ग्रीक, चीन,अरब तथा भारतभारत में दो प्रकार की संस्कृति है एक वैदिक तथा दूसरी तांत्रिक।


दक्षिण भारत के संत जिन्होंने तांत्रिक चिकित्सा  का अभ्यास किया तथा सामान्य रुप से मानव जाति की तथा विशेषकर अपने समाज की सेवा की लिए एक चिकित्सा पध्दति स्थापित की। वह संत सिध्दार नाम से जाने जाते हैं तथा उनके द्वारा चलाई गई चिकित्सा पध्दति को सिध्द चिकित्सा पध्दति कहा जाता है। अत: इस पध्दति के सृजन का श्रेय भगवान जो जगत के रचयिता है शिव  को जाता है,संत अगस्थियार को इस चिकित्सा पध्दति का जनक माना जाता है। उन्हें तमिलभाषा और संस्कृति का भी जनक माना जाता है।


आज के भगवान शिव को वैथेश्वरन,मरुन्थेश्वर कहा जाता है। आप सभी जानते हैं कि तमिल भाषा विश्व की पुरानी भाषाओं में से एक है,जो कि बहुत प्राचीन है। विभिन्न कालों में इसे तीन तमिल अकादमियों (तमिल संगम),जिसमें से पहले तमिल संगम की तिथि 3000 ई.पूर्व है,द्वारा पोषित एवं विकसित किया गया। थोल्काप्पिथम भी 3000 ईसा पूर्व में लिखि गई। जैसे आर एस एच ने  न्न डेकोन को विश्व के प्राचीन भू-विज्ञान रचना में से  एक माना है तथा महान तमिल अध्येता के ए अप्पादुरई ने कहा है कि तमिल की संस्कृति सभ्यता का उद्‍गम है।


तीसरी तमिल अकादमी (कदई संगम) की स्थापना ईसा पूर्व 2000 में हुई। न्नथिरुक्कुरल न्न तथा अन्य पुस्तकें स्मारक की प्राचीनता के प्रमाण है। दर्शनशास्त्र और औषधि सिक्के के दो पहलू हैं। महान दार्शनिक  यथा अरिस्टांटल, गलेन महान दार्शनिक और चिकित्सक भी थे। सिध्दार भी महान दार्शनिक और चिकित्सक थे । तमिल की कुछ पुस्तकों का नाम औषधियों पर रखा गया है जैसे -थिरुकडुगम (तीन पुन्गेंट ) और इलथी (कार्डोमोम) जबकि औषधियों से उनका कोई संबंध नही है।


यह तर्करहित सत्य है कि तमिल समृध्द संपदा, संस्कृति और चिकित्सा पध्दति बहुत प्राचीनत्व प्राप्त है सिध्द चिकित्सा की प्राचीन कथा और वंशावली की एक पृष्ठ भूमि है।