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आयुर्वेद फार्माकोपिया कमेटी वर्ष 1962 में प्रथम आयुर्वेदिक भेषज संहिता समिति का गठन किया गया था। उस समय से यह निरन्तर कार्यरत है। समिति की अवधि इसकी प्रथम बैठक से तीन वर्ष के लिए होगी तथा सदस्य उस अवधि तक पदेन रहेंगे। एपीसी की वर्तमान मुख्य समिति के अघ्यक्ष प्रो. एस.एस. हान्डा/डा. एस. के. शर्मा, सलाहकार (आयुर्वेद) आयुष विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय उपाध्यक्ष हैं तथा डॉ. जी. एस. लव्हेकर, निदेशक, सीसीआरएएस, सदस्य सचिव हैं। एपीसी के अन्तर्गत कार्य को अंतिम रुप देने के लिए निम्न रुप से उप समिति है
एपीसी उप समिति:
एपीसी की कार्यप्रणाली निम्न रुप से है:
प्रकाशन भारतीय आयुर्वेदिक भेषज: क.आयुर्वेदिक भेषज के पांच खण्डों का प्रकाशन किया गया है। जिसमें एकल औषधियों के पादप अवयवों पर 418 मोनोग्राफ है।
ख. भारतीय आयुर्वेदिक भेषज का प्रथम खण्ड (योगों), भाग-॥ अक्टूवर 2007 में 50 योगों को प्रकाशित किया गया एवं आरोग्य 2007 के दौरान जारी किया गया सीसीआरएएस के वेबसाइट पर उपलब्ध है।
ग. इ-बुक भेषजसंहिता के पांच खण्डों का प्रकाशन तथा बिक्री हेतु जारी है एवं सीसीआरएएसके वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। भारतीय आयुर्वेदिक फार्मुलरी: निर्माताओं के बीच एकरुपता लाना एवं उसी अनुपात में सघटकों के सूत्रों का अनुकरण करना। हिंदी एवं अंग्रेजी में भारतीय आयुर्वेदिक फार्मुलरी के दो भागों का प्रकाशन किया गया है।
एपीसी के अंतर्गत कार्यरत परियोजना:
विद्यमान योजना के अनुसार प्रयोगशालाऐं/अच्छे संसाधन युक्त संस्थान तथा वैज्ञानिक मानवशक्ति संहिता मानकों के विकास में कार्यरत है। इन संस्थानों को एसओपी एवं स्वीकार्यता अवधि अध्ययन के साथ आयुर्वेद योगों पर भेषज संहिता मानकों के विकास में परियोजना आवंटित।
एपीसी की संस्तुति पर एएसयू औषधियों की संरक्षण एवं गामा रेडिएशन द्वारा सूक्ष्मजीवाणु संदूषण से औषध योगों के लिए भारत सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किया गया। आयुर्वेद पादप आधारित औषधियों के सूक्ष्म जीवाणु संदूषण विलोपन के लिए तथा औषधयोगों की स्वीकार्य अवधि 5 से 10 कि.ग्रा. तक अनुपान की संस्तुति की गई है।
15 चयनित पादप अवयवों के आयुर्वेदिक अपरि¬कृत औषधियों का हाइड्रो एल्कोहॉलिक सत्व एवं जलीय पर अध्ययन चल रहा है।
अपरि¬कृत औषधियों की प्रमाणिकता (धातु एवं खनिज) अध्ययन प्रारम्भ किया गया है तथा आयुर्वेद में प्रयुक्त 47 धातु तथा खनिजों का मानकीकरण किया गया एवं 21 खनिज तथा धातु पर अध्ययनों को अंतिम रुप दिया गया और प्रकाशन की प्रक्रिया में है।
आयुर्वेद एकलमिश्रित औषधियों सुरक्षा मापक को विकसित करना तथा धातु पर अध्ययन निर्धारण एफोटोकिसन पेस्टसाइड अवशेष पादप अवयव के एकल औषधि में एवं कुछ लोकप्रिय प्रयुक्त आयुर्वेदिक योगों का विषाक्तता अध्ययन किए जा रहे हैं।
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