भेषज संहिता समिति


आयुर्वेद फार्माकोपिया कमेटी

वर्ष 1962 में प्रथम आयुर्वेदिक भेषज संहिता समिति का गठन किया गया था। उस समय से यह निरन्तर कार्यरत है। समिति की अवधि इसकी प्रथम बैठक से तीन वर्ष के लिए होगी तथा सदस्य उस अवधि तक पदेन रहेंगे। एपीसी की वर्तमान मुख्य समिति के अघ्यक्ष प्रो. एस.एस. हान्डा/डा. एस. के. शर्मा, सलाहकार (आयुर्वेद) आयुष विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय उपाध्यक्ष हैं तथा डॉ. जी. एस. लव्हेकर, निदेशक, सीसीआरएएस, सदस्य सचिव हैं। एपीसी के अन्तर्गत कार्य को अंतिम रुप देने के लिए निम्न रुप से उप समिति है

 

एपीसी उप समिति:

  1. एपीसी की फार्मुलरी उप-समिति (रस शास्त्र/भैषज्य कल्पना आयुर्वेदिक फार्मेसी)
  2. आयुर्वेद एकल औषधि उप-समिति (पादपों का एकल, औषधि, खनिज, धातु, जीव अवय उद्भव)
  3. भेषज अभिज्ञानीय उप-समिति (एपीसी)
  4. पादप रसायन की उप-समिति (एपीसी)

एपीसी की कार्यप्रणाली निम्न रुप से है:

  1. एकल/मिश्रित औषधियों पर एक भारतीय आयुर्वेदिक भेषज संहिता तैयार करना।
  2. मिश्रित आयुर्वेदिक योगों के लिए कार्य मानक निर्धारित करना। जिसमें पहचान के लिए परीक्षण शामिल हों, शुध्दता एवं गुणवत्ता से परिपूर्ण योगों की एकरुपता को सुनिश्चित करना।
  3. कार्यप्रणाली प्रक्रियाओं को चिन्हित करना तथा फार्मुलरी की कार्य योजना को अधिकार देना तथा सभी सामान्य रुप से प्रयुक्त औषधियों के मानकों को चरणबध्द से बाहर निकालना होगा।
  4. तैयार करने की कार्यप्रणाली के चित्रण को श्रेणीबध्द करने के सम्बंध में, अनुपान, विभिन्न अनुपान के साथ प्रबंधन की कार्यप्रणाली या मात्रा एवं उनकी विषाक्तता पर आयुर्वेदिक योगों पर सभी अन्य सूचनाएं प्रदान करना।

प्रकाशन

भारतीय आयुर्वेदिक भेषज:

क.आयुर्वेदिक भेषज के पांच खण्डों का प्रकाशन किया गया है। जिसमें एकल औषधियों के पादप अवयवों पर 418 मोनोग्राफ है।


खण्ड

प्रकाशन वर्ष

मोनोग्राफ की संख्या

1990

78

2

1999 

80

3

2001

100

4

2004

68

5

2006

92

6

2008

101

7 प्रेस मे 21( खनिज एवं धातु )

ख.   भारतीय आयुर्वेदिक भेषज का प्रथम खण्ड (योगों), भाग-॥ अक्टूवर 2007 में 50 योगों को प्रकाशित किया गया एवं आरोग्य 2007 के दौरान जारी किया गया   सीसीआरएएस के वेबसाइट पर उपलब्ध है।


खण्ड

प्रकाशन वर्ष

मोनोग्राफ की संख्या

2007

50

2

2008

51


ग.   इ-बुक भेषजसंहिता के पांच खण्डों का प्रकाशन तथा बिक्री हेतु जारी है एवं सीसीआरएएसके वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

भारतीय आयुर्वेदिक फार्मुलरी:

निर्माताओं के बीच एकरुपता लाना एवं उसी अनुपात में सघटकों के सूत्रों का अनुकरण करना। हिंदी एवं अंग्रेजी में भारतीय आयुर्वेदिक फार्मुलरी के दो भागों का प्रकाशन किया गया है।


भा.आयु.फा. भाग-॥

हिंदी

 

भा.आयु.फा.भाग-।

अंग्रेजी  

444 औषध योगों का समावेशन

भा.आयु.फा. भाग-॥

हिंदी

 

भा.आयु.फा. भाग-॥

अंग्रेजी 

191 औषध योगों का समावेशन

भा.आयु.फा. भाग-॥।      

द्विभाषी

500 औषध योगों का समावेशन मसौदा स्तर में है।


एपीसी के अंतर्गत कार्यरत परियोजना:

  • एसओपी का विकास, भेषज संहिता मानक, एवं औ¬षध योगों की स्वीकार्यता अवधि:

विद्यमान योजना के अनुसार प्रयोगशालाऐं/अच्छे संसाधन युक्त संस्थान तथा वैज्ञानिक मानवशक्ति संहिता मानकों के विकास में कार्यरत है। इन संस्थानों को एसओपी एवं स्वीकार्यता अवधि अध्ययन के साथ आयुर्वेद योगों पर भेषज संहिता मानकों के विकास में परियोजना आवंटित।

  • आयुर्वेद जड़ी-बूटीय के केमोप्रोफइलिंग तथा सूक्ष्मजीवाणु शुध्दिकरण के लिए गामा रेडिएशन द्वारा पूर्व उपचारित औषध योगों एवं जीव प्रभावकारिता का मूल्यांकन करना होता है।

एपीसी की संस्तुति पर एएसयू औषधियों की संरक्षण एवं गामा रेडिएशन द्वारा सूक्ष्मजीवाणु संदूषण से औषध योगों के लिए भारत सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किया गया। आयुर्वेद पादप आधारित औषधियों के सूक्ष्म जीवाणु संदूषण विलोपन के लिए तथा औषधयोगों की स्वीकार्य अवधि 5 से 10 कि.ग्रा. तक अनुपान की संस्तुति की गई है।

  • एएसयू औषधियों के घनसत्व के लिए एसओपी एवं भेषज संहिता मानकों का विकास

15 चयनित पादप अवयवों के आयुर्वेदिक अपरि¬कृत औषधियों का हाइड्रो एल्कोहॉलिक सत्व एवं जलीय पर अध्ययन चल रहा है।

  • आयुर्वेद में प्रयुक्त उचितधातुओं का प्रमाणिक नमूना, खनिज औषधियों का मानकीकरण करना

अपरि¬कृत औषधियों की प्रमाणिकता (धातु एवं खनिज) अध्ययन प्रारम्भ किया गया है तथा आयुर्वेद में प्रयुक्त 47 धातु तथा खनिजों का मानकीकरण किया गया एवं 21 खनिज तथा धातु पर अध्ययनों को अंतिम रुप दिया गया और प्रकाशन की प्रक्रिया में है।

  • भारी धातु सूक्ष्मजीवाणु भार एवं पादप अवयवों के एकल औ¬षधियों में पेस्टीसाइड अवशेष ।

आयुर्वेद एकलमिश्रित औषधियों सुरक्षा मापक को विकसित करना तथा धातु पर अध्ययन निर्धारण एफोटोकिसन पेस्टसाइड अवशेष पादप अवयव के एकल औषधि में एवं कुछ लोकप्रिय प्रयुक्त आयुर्वेदिक योगों का विषाक्तता अध्ययन किए जा रहे हैं।