आयुर्वेद में अवसर
प्रश्न 1: आयुर्वेदिक स्नातकों के लिए जीवन अवसर क्या है?
उत्तर: आयुर्वेदिक स्नातकों के लिए निम्नलिखित अवसर उपलब्ध हैं -
आयुर्वेद स्नातक स्वतंत्र रुप से अभ्यास कर सकता है
- ए-आयुर्वेदिक औषधीय उद्योग एवं आयुर्वेदिक तकनीकी विशेषज्ञ के रुप में एवं अन्य संबंधित संस्थाएं सम्मिलित हो सकते हैं
- बी-गैर सरकारी संगठन जो स्वास्थ्य परिचर्या वितरण पध्दतियों को प्रभावित कर रहे हैं यथा सीसीआरएएस के समान अनुसंधान संस्थाओं के भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद एवं सी.एस.आई.आर. इत्यादि में जेआरएफ, एसआरएफ के रुप में सम्मिलित हो सकते हैं।
- सी-आयुर्वेदिक डिग्रीधारक जो पीजी योग्यताएं रखते हैं अनुसंधान संवर्ग में सीसीआरएएस के समान अनुसंधान संगठनों में एवं शैक्षणिक संस्थाओं में भी अध्यापन व्यवसाय के लिए चुन सकते हैं।
प्रश्न 2: आयुर्वेदिक उद्योगों के लिए व्यवाय अवसर क्या है?
उत्तर: आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा की पध्दति है। भारत में लगभाग 70 % इसके जनसंख्या प्रयोग की स्वदेशी प्रणाली है। आयुर्वेदिक औषधियों के उपभोक्ताओं भारत एवं भारत से बाहर में दिन प्रतिदिन बढ रहे हैं एवं जड़ी बूटियों के दवा के उपभाग में महत्वपूर्णवृध्दि हो रही है। इस समय, आयुर्वेदिक उत्पादों की संख्याएं पोषक पदार्थ एवं स्वास्थ्य रक्षा उत्पादों के रुप में निर्यात जा रही है।
प्रश्न 3: आयुर्वेद में संबंध्द विज्ञानों के लिए जीवन अवसर क्या है?
उत्तर: बहुत बड़ी संख्या में संबंध्द विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भेषज अभिज्ञानीय, औषधशास्त्र, पादप रसायन, जीव प्रौद्यौगिकी है औषधीय विज्ञान इत्यादि डिग्रीधारक आयुर्वेद अनुसंधान में संलग्न किए जाते हैं। आयुर्वेदिक औषधि अनुसंधान में विकास, औषध मानकीकरण इत्यादि में अच्छा जीवन अवसर है।
प्रश्न 4: आयुर्वेद अनुसंधान में संलग्न संस्थाएं?
उत्तर:
- केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद - केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद, साहित्य अनुसंधान, औषध मानकीकरण औषधीय पादपों के सर्वेक्षण विषविज्ञान औषधशास्त्र का अध्ययन करता है एवं निदान चिकित्सात्मक अनुसंधान इत्यादि कार्यक्रम बनाती है।
- बी-भेषज संहिता प्रयोगशालाएं एवं औषधि निमार्ता:
- 1. भारतीय औषधि भेषज संहता प्रयोगशाला, गाजियाबाद
- 2. भारतीय मैडीसिन औषधीय निगम (आईएमपीसीएल) मोहन, अल्मोरा
- सी-राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर, गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के समान राष्ट्रीय संस्थान।
- डी-अन्य: राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड
इनके अतिरिक्त इ., वैज्ञानिक तथा औद्येगिक अनुसंधान परिषद् (आईआईसीटीआईआईआईएम, सीआईएमएपीसी.डी.आर.आई. इत्यादि), भारतीय चकित्सा अनुसंधान परिषद् (एनआईएन), रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन इत्यहादि के अंतर्गत अनेक प्रयोगशालाएं आयुर्वेद अनुसंधान में व्यस्त हैं।
- इ-अनेक निजी अनुसंधान संस्थानों/संगठन/प्रयोगशालाएं/उद्योग आयुर्वेद क्षेत्र के अनुसंधान में हैं।
प्रश्न 5: क्या आयुर्वेदिक स्नातकों हेतु भारत से बाहर के लिए कोई जीविका अवसर है?
उत्तर: अनेक यूरोपीय देशों, अमेरिका एवं अन्य देश में आयुर्वेदिक शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित की जा रही हैं। वहां शिक्षा, अनुसंधान इत्यादि के समान क्षेत्रों में काफी जीवन अवसर हैं।
प्रश्न 6: भारत में आयुर्वेद में यू.जी./पी.जी./पी.एच.डी. कितनी संस्थाएं प्रस्तुत कर रही हैं?
उत्तर: आयुर्वेद मे 219 महाविद्यालय 52 महाविद्यालय आयुर्वेद में विद्या वाचस्पति पाठयक्रम (बीएएमएस) तथा अनेक अंतर्स्नातक पाठयक्रम प्रस्तुत करते हैं, यथा-बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर, राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर, के एन.टी.आर. स्वास्थ्य विज्ञानों विश्वविद्यालय, विजयवाड़ा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर इत्यादि के समान विश्विवद्यालय आयुर्वेद (एमडी/एम.एस) में स्नातकोत्तर पाठयक्रम प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 7: आयुर्वेद में स्नातक एवं स्नात्तकोत्तर के अंतर्गत अध्ययन पाठ्क्रम की अवधि क्या है?
पाठयक्रम का नाम |
डिग्री का नाम |
अवधि |
स्नातक |
बीएएमएस (आयुर्वेद स्नातक एवं शल्यक्रमू) |
5 1/2 वर्ष (1वर्ष आवश्यक इंटर्नशीप) |
स्नातकोत्तर |
एम डीएमएस (आयुर्वेद)
(आयुर्विज्ञान वाचस्पति (आयुर्वेद)
|
3 वर्ष
शल्यक्रम का शिक्षक) (आयुर्वेद)
|
डॉक्टर की उपाधि |
विद्या वाचस्पति (आयुर्वेद) (दर्शनशास्त्र
(आयुर्वेद)
|
न्यनतम 2 वर्ष |
प्रश्न 8: पी.जी विशिष्टीकरण आयुर्वेद में कितने उपलब्ध हैं?
उत्तर: निम्नलिखित पी.जी विशेषताएं आयुर्वेद में उपलब्ध हैं ।
- आयुर्वेद सिध्दांत (आयुर्वेद की मूलभूत सिध्दांत)
- आयुर्वेद संहिता
- शरीर रचना (शरीर विज्ञान)
- क्रिया शरीर (शरीर विज्ञान)
- द्रव्य गुणविज्ञान (मलेरिया मेडिका एवं औषधशास्त्र)
- रस शास्त्र
- भैषज्य कल्पना (औषधियां)
- कौमरा भृत्य - बाल रोग (बालचिकित्सा)
- प्रसूती तंत्र एवं स्त्री रोग (प्रसूति विज्ञान एवं स्त्री रोग विज्ञान)
- स्वास्थ्य वृत्त (सामाजिक एवं निवारक दवा)
- कायचिकित्सा (आंतरिक दवा)
- रोग निदान एवं विकृति विज्ञान (रोग विज्ञान)
- शल्य तन्त्र (जनरल) (शल्य कर्म)
- शलक्य तंत्र! नेत्रा रोग/शिरो - नासा - कर्ण एव कण्ठ रोग, दन्त एवं मुख रोग
- मनोविज्ञान एवं मानस रोग (मनोचिकित्सा)
- पन्चकर्म
- अगद तंत्र एवं विधि वैद्यक
- संज्ञाहरण (असंवेदनशीता)
- छाया एवं विकिरण विज्ञान