सिध्द के लिए खतरे
प्रश्न1. क्या सिध्द के लिए वानस्पतिक या धात्वीय सम्पाक के उपभोग से कोई दुष्प्रभाव है!
उत्तर: अगर औषधि उचित रुप से सम्पाक नहीं है तो दुष्प्रभाव के कुछ संयोग रहता है!
प्रश्न:2 सिध्द में कोई विषाक्त औषधि प्रयोग होता है ।
उत्तर: कोडिवेलि, नरवालम्, सेरनकोटई, अरसेनिक एवं मर्करी जैसे कुछ विषाक्त औषधि हैं किन्तु शास्त्रीय पुस्तक एवं अधिकारियों द्वारा निर्धारित उचित शुध्दिकरण के पश्चात ही प्रयोग होता है ।
प्रश्न:3 वृक्क रोग में सिध्द औषधि सुरक्षित है ।
उत्तर: हाँ, अगर यह उचित रुप से तैयार किया गया है ।
प्रश्न:4 अच्छी तरह से तैयार सिध्द औषधियों के निर्धारण हेतु तकनीक क्या है ।
उत्तर: ए- पर्पम एवं चेन्दूरम का पूर्ण उत्पादन पानी की सतह पर तैरेगी लेकिन अपूर्ण उत्पादन पानी में सिकुड़ जाएगी ।
बी- पर्पम एवं चेन्दूरम के पूर्ण उत्पादन को जब अंगुलि से स्पर्श किया जाता है तो अंगुलिका चिन्ह दिखना चाहए । जब इसे अंगुली से स्पर्श किया जाए तो अंगूलिका खांचा स्पष्ट प्रभावित करेगी जोकि पूर्ण उत्पादन को संकेत करती है ।
प्रश्न:5 अगर धात्वीय औषधि की अधिक अनुपान लिया जाए तो कौनसा अवयव प्रभावित होता है!
उत्तर: धात्वीय औषधियों की अधिक मात्रा लेने से लीवर एवं किडनी के आंतरिक अवयव प्रभावित होंगे ।
प्रश्न:6 दुष्प्रभाव की उपेक्षा करने के लिए सिध्द में कोई प्रतिबंधित आहार है
उत्तर: हॉ, प्रतिबंधित आहार पथ्यापथ्य को ग्रहण करने से या चिकित्सक की सलाह अनुकरण करने से दुष्प्रभाव की उपेक्षा की जा सकती है ।
प्रश्न:7 सिध्द में कोई औषधि मिश्रण की समस्या है ।
उत्तर: हाँ कुछ वानस्पतिकों के प्रयोग के कारण औषधि मिश्रण में परिवर्तन होता है ।
प्रश्न: 8 सिध्द में कैंस एड्स चुनौती के लिए औषधि है ।
उत्तर: हाँ, कुछ ऑक्सीडेंट प्रतिरोधी वानस्पतिक औषधि यथा - अमुक्कारा चूर्णम एवं नेलिक्कई, लेगयम तथा पारदीय सम्पाक जैसे - रसागंथी, मेझुगु एवं ननधिमई चुनौती औषधि है ।
प्रश्न:9 सिध्द में ड्राबैक क्या है!
उत्तर: 9 ए- अनुदेश (तमिल) का माध्यम ! सिध्द से संबंधित सभी औषधियांपांडुलिपि सिध्द में है ।
बी- औषधि योग का अपमिश्रण
सी- विभिन्न क्षेत्रों एवं विभिन्न त्रऽतुओं में वानस्पतिक संग्रहण के कारण औषधियों की प्रभावकारिता में विभिन्नता ।
डी- सम्पाक विधि में व्यावहारिक समस्याएं
ई सिध्द कविता को समझने में कठिनाइयां
प्रश्न: 10 क्या सिध्द औषधियां सभी त्रऽतुओं एवं रोग में लाभदायक है ।
उत्तर: हाँ, उदाहरण के लिए
ए - ग्रीष्म हेतु नन्नारी सर्पथ एवं मथुलई मनाप्पगुशरीर हेतु, हीट तथा अशानथिकम
बी- शिविर हेतु अद्याथोई कुडीनीर, निलावेम्बुकुडीनीर । कफ ठंड एवं बुखार हेतु।
प्रश्न: 11 क्या सिध्द औषधि तीक्ष्ण बीमारी में लाभदायक है!
उत्तर: हाँ, बुखार में उदाहरण के लिए लिंगचेन्दूरम, सिरदर्द में गौरी चिन्दामणि चेन्दूरम, अस्थमा में कस्तूरी करुप्पु
प्रश्न: 12 क्या सिध्द में उच्च अध्ययन यथा - स्नातकोत्तर डिप्लोमा, एम एस एवं पीएच.डी.है
उत्तर: नहीं