नागरिक घोषणा पत्र
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केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद्
सं0 61-65,सांस्थानिक क्षेत्र,डी ब्लाक के सामने,
जनकपुरी,नई दिल्ली - 110058
दूरभाष: 28525831,28525852,28525862,
28525883,28525897,28520509,
फैक्स - 011 - 28520748
ई - मेल: ccras_dir1@nic.in/ccras_dir2@nic.in
वेबसाइट: www.ccras.nic.in
(आयुष विभाग)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
भारत सरकाऱ
नई दिल्ली
केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद्
नागरिक घोषणा पत्र (सिटिजन चार्टर) |
1. |
प्रस्तावना:-
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केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद् भारत में आयुर्वेद और सिध्द में अनुसंधान कार्य करने,उसे समन्वित करने,सहायता देने और प्रोत्साहित करने वाला एक शीर्ष निकाय है । परिषद् की स्थापना मार्च 1978 में केंद्रीय भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी अनुसंधान परिषद् के पुनर्गठन के पश्चात् की गई थी । परिषद् अपने क्रियाकलापों का संचालन अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन कार्यरत् अनुसंधान संस्थानों तथा केंद्रों के माध्यम से और देश के विभिन्न भागों में विश्वविद्यालयों संस्थानोंअस्पतालों में स्थित अनेक इकाईयों के माध्यम से करती है । परिषद् के अनुसंधान क्रियाकलापों में निदान चिकित्सात्मक,औषध,परिवार कल्याण,साहित्य,न्यूट्रास्यूटिकल,आयुर्वेदिक प्रसाधन सामग्री तथा पंचकर्म के जैव - चिकित्सीय उपकरण आदि संबंधी अनुसंधान शामिल हैं । इस समय 33 अनुसंधान संस्थानकेंद्रएकक कार्य कर रहे हैं । उनके पतों तथा क्रियाकलापों की सूची संलग्न है (कृपया अनुबंध नं. - 1 देखे) ।
परिषद् ने अनेक अग्रणी संस्थानों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान कार्य भी आरंभ किये है । कृपया अनुबंध नं.-2 देखें) । इनके अतिरिक्त,परिषद् विभिन्न क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यो का संचालन कर रही है । (अनुबंध नं.-3 देखें ) । |
2. |
हमारा उद्देश्य और दूरदर्शिता
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उद्देश्य |
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परिषद् का उद्देश्य आयुर्वेद एवं सिध्द चिकित्सा पध्दतियों में भारत की अनुसंधान आवश्यकताओं को पूरा करने का है तथा अत्याधुनिक अनुसंधान कार्यो के माध्यम से रोगों के निदान,निवारण तथा प्रबंधन के क्षेत्र में विशिष्टता और वैश्विक नैतृत्व प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयास करती है। |
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दूरदर्शिता |
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उभरते स्वास्थ्य परिदृश्य तथा आयुर्वेद एवं सिध्द चिकित्सा पध्दतियों की आवश्यकता का समुचित मूल्यांकन करते हुए,केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद् वर्ष 2020 के लिए निम्नलिखित दृष्टिकोण पत्र (विजन स्टेटमैंट) घोषित करती है:- ( हम आयुर्वेद और सिध्द संबंधी अनुसंधान कार्य करने,उसे समन्वित करने, सहायता देने तथा प्रोत्साहन देने के लिए केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद् को एक गतिशील,सक्रिय और आदर्श अनुसंधान संगठन के रुप में विकसित करेंगे ।
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- हम देश की उभरती स्वास्थ्य आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारत की अनुसंधान संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे ।
- हम उभरते महत्वपूर्ण रोगों के उपचार तथा निवारण के लिए अनुसंधान और स्वास्थ्य संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में वैश्विक नैतृत्व प्राप्त करेगें ।
- हम परिषद् के अनुसंधार्नकत्ताओं में प्रतिस्पर्धा, विशिष्टता एवं नवीनता को प्रोत्साहन देने के लिए एक प्रणाली विकसित करेगें ।
- हम आयुर्वेद और सिध्द को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रोद्योगिकी का प्रयोग करेगें ।
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3. |
हमारी वचन बध्दता
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- परिषद् आयुर्वेद एवं सिध्द चिकित्सा पध्दतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण रोगों का व्यावहारिक एवं यथार्थ समाधान खोजने संबंधित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करेगी ।
- हम भारत और विदेश में आयुर्वेद और सिध्द को बढावा देंगे ।
- परिषद्र् कत्तव्यनिष्ठ,अनुशासित और कार्यकुशल रहेगी ।
- हम सभी अंशधारकों के साथ आदर एवं शिष्टाचार का व्यवहार करेंगे ।
- हम उभरते महत्वपूर्ण रोगों के उपचार तथा निवारण के लिए अनुसंधान और स्वास्थ्य संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करेगें ।
- परिषद् के अधिकारी एवं कर्मचारीगण सहायक और सहयोगी रहेगें ।
- हम आयुर्वेद और सिध्द अनुसंधान से संबंधित पूछताछ पर तत्परता से ध्यान देंगे ।
- हम अपने बहिरंग रोगी विभाग (ओ.पी.डी.) और अंतरंग रोगी विभाग (आई.पी.डी.) में आने वाले रोगियों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करेंगे।
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4. |
हमारा उद्देश्य
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- आयुर्वेद और सिध्द में वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान कार्यक्रम तथा परियोजना तैयार करना।
- आयुर्वेद और सिध्द में समयबध्द तथा किफायती तरीके से वैज्ञानिक अनुसंधान करना ।
- केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद् के विभिन्न एककों तथा अन्य अनुषंगी परिषदोंसंगठनों के साथ अनुसंधान को समन्वित करना,उसे सहायता देना,प्रोत्साहन देना तथा सहयोग देना ।
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आयुर्वेद में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों को अन्य तकनीकी संगठनों के सहयोग से आधुनिक बनाना ।
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5. |
हमारे कार्यकलाप और उपलब्धियाँ:
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इस परिषद् के अंतर्गत किए जाने वाले अनुसंधान कार्यक्रम को मुख्यतया स्वास्थ्य संरक्षण व चिकित्सकीय अनुसंधान, औषधीय अनुसंधान ,चिकित्सा प्रजाति वानस्पतिक सर्वेक्षण का र्यक्रम,औषधी पादप कृषि संबर्धन,कस्तूरीमृग प्रजनन कार्यक्रम, भेषज अभिज्ञानीय अनुसंधान अध्ययन,पादप ऊतक संवर्धन,औषध मानकीकरण,भेषज गुण विज्ञानीयविष विज्ञान संबंधी अध्ययन, परिवार कल्याण अनुसंधान (चिकित्सात्मक और प्रयोगात्मक), प्रजनन और बाल स्वास्थ्य संरक्षण अनुसंधान,आमची अनुसंधान कार्यक्रम,प्रलेखन और प्रकाशन सहित साहित्य अनुसंधान में वर्गीकृत किया जा सकता है ।
पिछले तीन दशकों में परिषद् के नैदानिक अनुसंधान क्रियाकलाप से मलेरिया के लिए आयुष - 64,अपस्मार के लिए आयुष - 56, मधुमेह के लिए आयुष - 82,किटिभ रोग के लिए 777 तेल, श्वित्र रोग (ल्यूकोडरमा) के लिए पूनीमिलाई चिंदूरम और गर्भ निरोधक के रुप में पिप्पल्यादि योग जैसे औषध योगों का विकास हुआ है । मेदोरोग के लिए विभिन्न गुग्गुलु योगों मानसिक मन्दता के लिए मंडूकपर्णी, यकृत् विकार के लिए कटुकी आदि अन्य औषधियों के चिकित्सकीय प्रभाव का अध्ययन किया गया । इसके अतिरिक्त,तंत्रिका संबंधी विभिन्न विकारों के उपचार के लिए पंचकर्म चिकित्सा, आमारचिक विकारों के लिए आमाशय शोधन चिकित्सा, जैसी शल्य तकनीकी, भगंदर गुद - मलाशय गत रोगों के उपचार के लिए क्षार सूत्र चिकित्सा,विभिन्न त्वचा रोगों नेत्र रोगों आदि में जलौका प्रयोग आदि विशिष्ट उपचार प्रक्रियाओं सफलता पूर्वक निरुपण किया गया है । परिषद ने तीस रोगों के लिए सूत्र (फार्मलेशन) विकसित किए हैं जिनमें नैदानिक अनुसंधान करने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकता वाले रोग भी शामिल है अनुबंध नं-4 देखें ) राष्ट्रीय एवं वैश्विक प्राथमिकता छाले रोगों सहित तीस रोगों के चिकत्सकीय अनुसंधान हेतु परिषद् ने औषध योगों को विकसित किया है । (अनुबंध नं-4 देखें )
औषध अनुसंधान के अंतर्गत 1,20,000 से अधिक पौधों के नमूने और साथ ही पादप,खनिज और उदभिद् के 3,000 संग्रहालय औषध नमूने तथा 5,000 पादप आधारित लोक औषधियां एकत्र की गई हं। अब तक लगभग 175 महत्वपूर्ण आयुर्वेदसिध्द औषधीय - पौधों औषधों के संबंध में भेषज अभिज्ञानीय अनुसंधान कार्य पूरा किया गया ह । लगभग 500 एकल औषधों तथा 50 औषध योगों को भौतिक - रासायनिक आधार पर मानकीकृत किया गया है और लगभग 675 औषध योगों का प्रयुक्त विश्लेषणात्मक मूल्याकन कार्य किया है। आयुर्वेद एवं सिध्द चिकित्सा पध्दतियों में 300 औषधों के संबंध में रासायनिक अध्ययन पूरा किया गया है ।
परिषद् ने अपने अनुसंधान और अन्य क्रियाकलापों के बारे में वैज्ञानिक समुदाय को अवगत कराने के लिए एक सूचनापत्र के अलावा 100 पुस्तकेंमोनोग्राफ प्रकाशित किए हैं और साथ ही त्रैमासिक पत्रिकाएं न्न जर्नल ऑफ रिसर्च इन आयुर्वेद एंड सिध्द,बुलेटिन आफ मेडिको - एथनो - बोटनीकल रिसर्च न्न तथा न्न बुलेटिन ऑफ इंडियन इंस्टिटयूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ मेडिसिन (द्विवार्षिक) भी प्रकाशित कर रही है । (अधिक जानकारी के लिए देखिए वेबसाइट www.ccras.nic.in )
परिषद् ने 15 प्रक्रियापेटेन्टस् 4 औषध पेटेन्टस् प्राप्त कर लिया है इनके अतिरिक्त 12 पेटेन्टस् मंजूर किए जाने के लिए दाखिल किए हैं (अनुबंध नं. - 5 देखें) |
6. |
हमारी उपलब्ध सेवाएंसुविधाएं
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रोगी परामर्शदात्री सेवाएं- :- |
परिषद् पूरे देश में फैले अपने संस्थानोंकेंद्रों एककों के ओ.पी.डी. और आई.पी.डी.में परिषद् की अनुसंधान परियोजनाओं में शामिल किए गए रोगियों को नि:शुल्क उपचार,जाँच सुविधा और औषधियां उपलब्ध कराती है और साथ ही सामान्य रोगियों को भी नाममात्र के शुल्क पर परामर्श, जांच और औषधियां उपलब्ध कराती है (अनुबंध नं. - 6 देखे) |
विशेष चिकित्सा सेवाएँ :- |
परिषद् पंचकर्म उपचार (शरीर संशोधन की पाँच प्रकार की आयुर्वेदिक विधियाँ),गुद - मलाशयिक रोगों के लिए क्षार - सूत्र जैसी अल्प शल्य क्रियाएं तथा शल्य व गैर शल्य समस्याओं के लिए जालौका प्रयोग की सेवाएँ अनुसंधान परियोजनाओं के रोगियों को नि:शुल्क और सामान्य रोगियों को नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध कराती है । (अनुबंध नं. - 6 देखे) । |
अनुसंधान परामर्शदात्री सेवाएँ-:- |
परिषद् अन्य संगठनों व्यक्तियों तथा उद्योगों को अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे चिकित्सकीय,औषध अनुसंधान आदि के संबंध में परामर्श सेवाएं उपलब्ध करा रही है । |
अल्पावधि प्रशिक्षण पाठयक्रम: |
नाममात्र के शुल्क पर स्थानीय सर्वेक्षण तथा औषधीय पौधों के संग्रहण लोक दावों, ऊतक संवर्धन, औषध मानकीकरण तथा भेषज अभिज्ञानीय के संबंध में अल्पावधि प्रशिक्षण पाठयक्रम संचालित कर रही है । |
पंचकर्म चिकित्सा संबंधी प्रशिक्षण:- |
परिषद् नाममात्र के शुल्क पर चिकित्सकों एवं तकनीकी कर्मचारियों के लिए पंचकर्म चिकित्सा संबंधी प्रशिक्षण पाठयक्रम संचालित कर रही है । |
पुस्तकालय सेवाएँ :- |
परिषद् पांडुलिपियोंदुर्लभ पुस्तकों आदि से संबंधित मामलों के संबंध में जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न संस्थानों में पुस्तकालयों तथा इंडियन इंस्टिटयूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ मेडिसिन,हैदराबाद में
एक संग्रहालय का संचालन कर रही है । परिषद् के मुख्यालय स्थित पुस्तकालय में आयुर्वेद,सिध्द और आधुनिक चिकित्सा की 11,500 से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं । इसमें अनेक वैज्ञानिक पत्रिकाएं सामयिकी भी उपलब्ध है ।
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प्रकाशन और बिक्री:- |
परिषद् के अनुसंधान से संबंधित प्रकाशनों तथा जन सामान्य के लिए उपयोगी स्वास्थ्य संबंधी अन्य प्रकाशनों के प्रकाशन तथा उनकी बिक्री के लिए परिषद् में एक प्रकाशन विभाग है । (अधिक जानकारी के लिए देखिए हमारी वेबसाइट www.ccras.nic.in) |
वित्तीय सहायता:- |
परिषद् आयुर्वेद और सिध्द के विकास के लिए बहिर्वर्ती अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से आयुर्वेद और सिध्द संगठनों, व्यक्तियों और उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है तथा परिषद् आयुर्वेद सिध्द के एम.डी.और पी.एच.डी. के शोध छात्रों को भी आकस्मिक अनुदान के रुप में वित्तीय सहायता दे रही है । अधिक जानकारी के लिए देखिए हमारी वेवसाइट www.ccras.nic.in |
संग्रहालय:- |
परिषद् के मुख्यालय में परिषद् के अनुसंधान क्रियाकलापों को दर्शाने वाला एक केंद्रीय संग्रहालय तथा केंद्रीय वानस्पतिक संग्रह है । |
7.
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समीक्षा:-
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परिषद् घोषणा पत्र (सिटिजन चार्टर) चार्टर की समय - समय पर समीक्षा करती रहेगी । |
8.
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परिवाद एवं शिकायतें :-
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परिवाद एवं शिकायतें निम्नलिखित को संबोधित की जाएं :- |
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उप निदेशक (तकनीकी),
केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद्,
सं0 61-65,सांस्थानिक क्षेत्र,डी ब्लाक के सामने,
जनकपुरी,नई दिल्ली - 110058
दूरभाष: 28522010, फैक्स - 011 - 28520748
ई - मेल: ccras_tec@nic.in
वेबसाइट: www.ccras.nic.in
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
महानिदेशक,
केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिध्द अनुसंधान परिषद्
सं0 61-65,इन्स्टिटयूशनल एरिया,डी ब्लाक के सामने,
जनकपुरी,नई दिल्ली - 110058
दूरभाष: 28525831,28525852,28525862,
28525883,28525897,28520509
फैक्स - 011 - 28520748
ई - मेल: ccras_dir1@nic.in/ccras_dir2@nic.in
वेबसाइट: www.ccras.nic.in
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Annexure
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