मूलभूत सिध्दांत

आयुर्वेद का उद्देश्य स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य का संरक्षण एवं संवर्धन करना है तथा रोगी को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाना है एवं मानव के भौतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के उत्थान की अपेक्षा करना है।


आयुर्वेद के मतानुसार सृष्टि पांच मूल तत्वों (महाभूत) से मिलकर बनी है। यथा - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश। मानव शरीर भी इन पांचों तत्वों से ही मिलकर बना है अत: मानव एवं सृष्टि के बीच तात्विक समानता है। मानव एवं सृष्टि के मध्य एक स्वस्थ तात्विक अनुपात होना स्वास्थ्य का मूल आधार है। आयुर्वेद त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) सिध्दांत पर आधारित है। मानव शरीर सात धातुओं से मिलकर बना है यथा - रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा एवं शुक्र। तीन मल - मूत्र, पुरीष एवं स्वेद। समस्त धातुओं का प्रशस्त भाग ओज कहलाता है जो कि शरीर में रोग प्रतिरक्षा एवं बल के लिए उत्तरदायी है।